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Saturday, October 31, 2015

मिडिया और भाजप : पत्नी- पतिवाला झगडा


(पुण्य प्रसून बाजपाई और नीतिन गडकरी के बीच 30 अक्तूबर 2015 को  प्रश्नोत्तरी मुंबई मंथन कार्यक्रम में हुई इस को देख के ये लिखा)

पत्नी: चलिये बताइये, खाने में क्या पसंद करेंगे?
पति: जो तेरी मरजी हो वो ही बना।
पत्नी: देखा मुन्ना तेरे पिताजी तो वैसे कहते है जैसे मैं अपनी ही मरजी चलाती हूं
पति: एसा मैने कब कहा?
पत्नी: आपके कहने का यही मतलब था। खूब समजती हूं आपको।

पति: अच्छा चलो कुछ ऐसा बनाओ कि मजा आ जाये।
पत्नी: देखा मुन्ना? मैं कभी मजा आये ऐसा खाना ही नहीं बनाती।
पति: एसा मैने कब कहा?
पत्नी: आपके कहने का यही मतलब था। खूब समजती हूं आपको।

पति: तो फिर कुछ तीखा मसालेदार खाना बना दे।
पत्नी: देखा मुन्ना? अब इन को मसालेदार खाना है जैसे मैने कभी खिलाया ही न हो।
पति: एसा मैने कब कहा?
पत्नी: आपके कहने का यही मतलब था। खूब समजती हूं आपको।

पति: चल एसा  कर दालचावल ही खिला दे।
पत्नी: दाल के दाम इतने बढ गये और इनको दाल चावल खाना है? मैं घर कैसे चलाती हूं आपको क्या मालूम। आपको तो बस पैसे उडाने है।
पति: तो ये मेकअप का  सामान, ब्यूटीपार्लर का खर्च, ये महंगे ड्रेस ये साडी....
पत्नी: देखा मुन्ना। अब मेरे खर्च इनको बोज लगने लगे। मैं तो पैसे उडाती हूं।
पति: एसा मैने कब कहा?
पत्नी: आपके कहने का यही मतलब था। खूब समजती हूं आपको।

पति: अरे भाग्यवान, बात मामूली सी थी। तुमने कहां से कहां पहूंचा दी?
पत्नी (झोर से बोलने लगती है): देखा मुन्ना? अब इनको मेरी सारी बाते मामूली लगती है।
पति: एसा मैने कब कहा?
पत्नी: आपके कहने का यही मतलब था। खूब समजती हूं आपको।

ये सिलसिला एसे ही चलता रहता है। इस में आप पत्नी की जगह पूण्य प्रसून वाजपेयी, अर्नब गोस्वामी, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, अंजना ओम कश्यप को समज ले और पति की जगह भाजप (वो चाहे सरकार में हो या विपक्ष में मिडिया को वो भाता ही नहीं)। अब ये फिर से पढें।